BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की अहम मुलाकातें, वैश्विक कूटनीति पर टिकी नजरें
BRICS Summit 2026 में भारत की सक्रिय कूटनीति, BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का केंद्र बन गई है। समिट के बीच मोदी की लगातार हो रही द्विपक्षीय मुलाकातें यह संकेत दे रही हैं कि भारत बहुपक्षीय मंचों के साथ-साथ अलग-अलग देशों के […]
Nimmi Chaudhary
Published: शनिवार, 12 सितंबर 2026 | 8:36 PM
Reading Time: 6 min read
शेयर करें:
BRICS Summit 2026 में भारत की सक्रिय कूटनीति, BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का केंद्र बन गई है। समिट के बीच मोदी की लगातार हो रही द्विपक्षीय मुलाकातें यह संकेत दे रही हैं कि भारत बहुपक्षीय मंचों के साथ-साथ अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने मलेशिया, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम के नेताओं से भी बातचीत की।
इन बैठकों को केवल औपचारिक शिष्टाचार के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इन्हें ऊर्जा, व्यापार, निवेश, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम मुद्दों पर भारत की रणनीतिक पकड़ के रूप में समझा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात को BRICS मंच पर सबसे अहम बैठकों में से एक माना जा रहा है। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह बातचीत दोनों देशों के बीच भरोसे और निरंतरता का संदेश देती है।
इसी तरह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ हुई चर्चा भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के लिए ईरान के साथ संबंध चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया तक पहुंच और व्यापारिक मार्गों की दृष्टि से रणनीतिक महत्व रखते हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों के साथ संवाद
आज प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया, इथियोपिया, UAE और वियतनाम के नेताओं से भी बातचीत की। यह साफ संकेत है कि भारत BRICS जैसे मंचों का उपयोग केवल बड़े वैश्विक खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ भी अपने रिश्ते गहरे कर रहा है।
मलेशिया और वियतनाम के साथ भारत का संवाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक और सामरिक सहयोग को मजबूत कर सकता है। वहीं UAE के साथ बातचीत व्यापार, निवेश, ऊर्जा और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है। इथियोपिया के साथ चर्चा अफ्रीका में भारत की बढ़ती भागीदारी और विकास सहयोग को रेखांकित करती है।
शी जिनपिंग से बैठक पर दुनिया की नजर
शाम को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। भारत-चीन संबंध पिछले कुछ वर्षों में सीमा तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में BRICS Summit 2026 के दौरान होने वाली यह मुलाकात कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की अहम मुलाकातें, वैश्विक कूटनीति पर टिकी नजरें
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने, सीमा पर शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने तथा व्यापारिक संबंधों में संतुलन बनाने की दिशा में अहम हो सकती है। हालांकि, किसी बड़े नतीजे की उम्मीद से ज्यादा इस बैठक को संवाद की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
BRICS मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की लगातार बैठकों से यह स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से सामने रख रहा है। BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा मंच बनता जा रहा है जहां विकासशील देश वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, बहुध्रुवीय विश्व और समान अवसरों की बात कर रहे हैं।
भारत की प्राथमिकता इस मंच के जरिए ऐसे सहयोग को आगे बढ़ाना है, जो आर्थिक विकास, तकनीकी साझेदारी, जलवायु समाधान और वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सके। मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का यही व्यापक संदर्भ है, जिसमें भारत अपने हितों को साधते हुए साझेदारी का दायरा भी बढ़ा रहा है।
क्यों अहम है यह कूटनीतिक सक्रियता
आज के वैश्विक परिदृश्य में जब भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन की चुनौतियां और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, तब BRICS जैसे मंचों पर सक्रिय कूटनीति बेहद जरूरी हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी की इन बैठकों को भारत की बहु-आयामी विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें संवाद, संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता तीनों का मेल दिखाई देता है।
BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी ने इस मंच को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इन नेताओं के बीच होने वाली बातचीत आने वाले महीनों में वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकती है।
BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय भागीदारी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। पुतिन, पेजेशकियान, जिनपिंग और अन्य नेताओं के साथ उनकी मुलाकातें यह बताती हैं कि भारत आज केवल एक सहभागी देश नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली कूटनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक से क्या नए संकेत सामने आते हैं।