Gen-z की नब्ज टटोलने में जुटा संघ, 2027 से पहले प्रांत स्तर पर संवाद की रणनीति
सोशल मीडिया के दौर में Gen-z यानी नई पीढ़ी के सवाल, अपेक्षाएं और असहमति अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो गई हैं। बदलते सामाजिक माहौल, तेज डिजिटल संवाद और नई पीढ़ी की अलग सोच को देखते हुए संघ अब यह समझना चाहता है कि युवाओं को किन मुद्दों पर संगठन […]
Nimmi Chaudhary
Published: सोमवार, 10 अगस्त 2026 | 3:26 PM
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सोशल मीडिया के दौर में Gen-z यानी नई पीढ़ी के सवाल, अपेक्षाएं और असहमति अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो गई हैं। बदलते सामाजिक माहौल, तेज डिजिटल संवाद और नई पीढ़ी की अलग सोच को देखते हुए संघ अब यह समझना चाहता है कि युवाओं को किन मुद्दों पर संगठन से दूरी महसूस होती है और किन बातों पर वे असहमति जताते हैं।
इसी दिशा में संघ ने 2027 से पहले एक व्यापक रणनीति बनाने की तैयारी शुरू की है। इसका मकसद केवल युवाओं तक पहुंच बनाना नहीं, बल्कि उनकी भाषा, उनकी प्राथमिकताओं और उनके सवालों को गंभीरता से समझना भी है।
संघ की योजना के तहत यह संवाद केवल केंद्रीय स्तर पर सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रांत स्तर पर भी आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं की सोच, सामाजिक अनुभव और स्थानीय मुद्दों को समझना है। माना जा रहा है कि हर प्रांत में युवाओं की चिंताएं और अपेक्षाएं अलग हो सकती हैं, इसलिए एक समान संदेश की बजाय क्षेत्रीय संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।
संघ का मानना है कि आज की पीढ़ी केवल परंपरागत विचारों से नहीं, बल्कि तर्क, पारदर्शिता और त्वरित प्रतिक्रिया से प्रभावित होती है। ऐसे में संगठन को अपने संवाद के तरीके में भी बदलाव करना होगा।
किन मुद्दों पर असहमति जानना चाहता है संघ
आरएसएस यह जानना चाहता है कि जेन जी को किन विषयों पर सबसे अधिक असहमति है। इनमें सामाजिक समरसता, रोजगार, शिक्षा, डिजिटल स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी, सांस्कृतिक पहचान और संगठनात्मक शैली जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
नई पीढ़ी की सोच पहले की तुलना में अधिक सवाल पूछने वाली और कम औपचारिक मानी जाती है। ऐसे में संघ के सामने चुनौती यह है कि वह इन सवालों को केवल वैचारिक विरोध के रूप में न देखे, बल्कि उन्हें संवाद का अवसर माने।
Gen-z की नब्ज टटोलने में जुटा संघ, 2027 से पहले प्रांत स्तर पर संवाद की रणनीति
डिजिटल युग में बदल गया है संवाद का स्वरूप
सोशल मीडिया ने युवाओं के विचार व्यक्त करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। अब कोई भी मुद्दा कुछ ही मिनटों में व्यापक बहस का विषय बन सकता है। इसी कारण संघ भी यह समझ रहा है कि केवल पारंपरिक बैठकों और भाषणों से नई पीढ़ी तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
जेन जी त्वरित, स्पष्ट और तथ्य आधारित संवाद चाहती है। वह केवल संदेश नहीं, बल्कि उसके पीछे की सोच, तर्क और व्यवहारिकता भी देखती है। इसलिए संघ की यह पहल डिजिटल युग की इसी बदलती मांग के अनुरूप मानी जा रही है।
2027 से पहले क्यों अहम है यह रणनीति
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से 2027 का समय संघ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले संगठन अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने और नई पीढ़ी के साथ बेहतर संबंध बनाने की दिशा में काम करना चाहता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि जेन जी के साथ संवाद को समय रहते मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में संगठनात्मक प्रभाव और सामाजिक स्वीकार्यता पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि संघ अब पहले से अधिक सक्रिय और सुनियोजित तरीके से युवाओं तक पहुंचने की तैयारी कर रहा है।
Gen-z : युवाओं की भाषा में बात करने की जरूरत
Gen-z : प्रांत स्तर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी बात युवाओं की भाषा में कैसे रखे। नई पीढ़ी औपचारिकता से अधिक सहजता, सवालों से अधिक जवाब और नारों से अधिक समाधान चाहती है।
इसीलिए प्रांत स्तर के संवाद कार्यक्रमों में केवल विचार प्रस्तुत करने के बजाय सुनने की प्रक्रिया को भी उतना ही महत्व दिया जाएगा। यह देखा जाएगा कि युवा किन कारणों से असहज हैं, किन मुद्दों पर उन्हें भरोसा नहीं है और किन क्षेत्रों में वे संगठन से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं।
संवाद से बनेगी नई रणनीति
RSS की यह पहल संकेत देती है कि संगठन अब केवल परंपरागत ढांचे में काम करने के बजाय सामाजिक बदलावों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रहा है। जेन जी के सवालों को समझकर संघ एक ऐसी रणनीति तैयार करना चाहता है, जो आने वाले वर्षों में अधिक प्रभावी और समकालीन हो।
यदि यह संवाद सफल रहता है, तो यह न केवल संघ के लिए बल्कि व्यापक सामाजिक विमर्श के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। क्योंकि नई पीढ़ी के सवालों को समझना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।